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  • श्री भूमा निकेतन का सुझाव आज एक अच्छा काम करना है।
  • देशवासियों इस कुम्भ पर संकल्प लें! म्न से कर्म से एवं अन्त:करण से गंगा को स्वच्छ खाना है एवं उसके जल की रक्षा करनी है। यह देश की शान है, इसका जल ही लोगों के प्राण है।
  • न जल रहेगा न पेट्रोल रहेगा और न डीजल रहेगा किसान का एक साथ केवल गाय और बैल रहेगा।
  • सुखदेव प्रसन्न रहना चाहिए, ईश्वर की यह सर्वोपरि भक्ति है तथा आरोग्यता की परम्‌ औषधि है।
  • जीवन भर नौकरी या व्यापार कर परिवार के लिए धन कमाया, अपने लिए क्या कमाया जो तुम्हारे साथ जायेगा ?
  • प्रणाम अपनों से बडों को तथा नमस्कार बराबर वालों को और आशीर्वाद छोटों के प्र्रति ही होना ।
  • कुम्भ पर्व की पहचान है गंगा किसानों की श्रृंगार है गंगा, गंगा सबकी माता है।
  • भारत की शान है गंगा, हिन्द राष्ट्र की आन है गंगा, गंगा स्वच्छ-भारत स्वथ्य।
  • ईश्वर के प्रति जिस समय श्रद्धा भाव जागृत हो जाये, भजन कीर्तन के लिए सर्वोतम समय वही है।
  • हमें गोवंश की रक्षा करनी है। राष्ट्र की संदेश देना है, गोवंश को राष्ट्र-ऊर्जा घोषित करना है।
  • गौ संरक्षण का संकल्प लें, क्योकि गाय का दूध मॉ के दूध के समान है।
  • समस्त तीर्थ यात्रियों का श्री भूमा निकेतन की ओर से हार्दिक स्वागत।
  • मानवता की प्राण है गंगा, संस्कृति की जान है गंगा, हर हिन्दुस्तानी की प्राण है गंगा।
  • खाओ मन भर, छोड़ो न कण भर।
  • तुम संसार के मालिक नही, किन्तु सतत्‌ परिश्रम और सेवा के द्वारा सेवक अवश्य बन सकते हो।
  • किसी के दु:ख में शामिल होने से हमारी कोई हानि नहीं होती, किन्तु उस व्यक्ति को बहुत बड़ा लाभ होता है।
  • दान कोई प्रशंसा का विषय नहीं है, दानी को कभी आत्मप्रशंसा न करनी चाहिए, न सुननी चाहिए।
  • श्री भूमा निकेतन की दिशा
    परमात्मा द्वारा प्रदत्त जिव्हा भोजन एवं भजन दोनों के लिए है, केवल रसास्वादन के लिए ही नहीं।
  • सब कुछ अपनी इच्छा के अनुकूल हो यही सुख तथा सब कुछ अपनी इच्छा के प्रतिकूल हो, यही दु:ख है।
  • मनुष्य दु:खी इसलिए है क्योंकि वह परमेश्वर के विधान को जानता है, किन्तु मानता नहीं।
  • मन को धोने के लिए संसार का समस्त जल काम में नहीं आता, उसके लिए तो पश्चाताप रूपी एक बूॅद ऑसू ही पर्याप्त है।
  • पहले अपने आपको सुधारो, बाद में दुनिया को सुधारना, जो अपने आपको नहीं सुधार सका, वह दुनिया को क्या सुधारेगा।
  • कुम्भ पर्व पर आने का महत्व तभी है, जब प्रत्येक देशवासी इस राष्ट्र नदी क ेजल की रक्षा अपने प्राणों के समान करें।
  • मनुष्य के दु:ख का सबसे बड़ा कारण है, उसकी अनन्त इच्छायें।
  • श्री भूमा निकेतन का कर्तव्य जन्म देने वाली माता अनेक हो सकती हैं, देश की माटी एवं भारत माता एक है।
  • श्री गुरू गद्दी
    जरा झुक के जीवन एक गुहा (गुफा) है जिसमे सुख भी हैं, दुख भी, देखकर चलना ही जीवन है यह समझकर ही प्रवेश करे।
  • आश्रम द्वारा निर्माण कारायी गयी इस झॉकी पर दानदाता का नाम आदि अंकित होना शेष है। इच्छुक दानवीर अपने प्रियजन के नाम से विशेष अवसर पर समर्पण करने हेतु कार्यालय में सम्पर्क करें।
  • मनुष्य का सबसे बड़ा दोष यही है कि वह स्वंय को निर्दोष समझता है।
  • श्री भूमा निकेतन का महावाक्य मीठा बोलन, नम चलन करना पर- उपकार।
  • श्री भूमा निकेतन का लक्ष्य मानव सेवा, ईश्वर सेवा
  • परमात्मा की कृपा से सबका कल्याण होता है, किन्तु तुम यथा शक्ति कृपा करके कुछ लोगों का कल्याण अवश्य कर सकते हो।
  • जिस वस्तु को प्राप्त करके सुखी होना चाहते हो, वह वस्तु जिसके पास है, क्या वह सुखी है।
  • संसार में सबसे सरल काम है किसी को धर्मोपदेश देना तथा सबसे कठिन काम है अपने धर्म का पालन करना।
  • किसी के भाग्य को बॉटा नहीं जा सकता, किन्तु सुख-दु:ख को अवश्य बॉटा जा सकता है।
  • ईश्वर ने आपको अमूल्य इन्द्रियॉ उपयोग के लिए दी है, उपभोग के लिए नहीं।
आश्रम के बारें में

मायापुरी हरिद्वार में एक मात्र आदि शंकराचार्य की परम्परा से उपलक्षित पीठ भूमा निकेतन मॉं भागीरथी के पावन तट पर स्थित है । इस पीठ के पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित स्वामी श्री अच्युतानन्द तीर्थ जी महाराज का ज्योतिष शास्त्र के प्रति अत्यधिक रूचि व विश्वास है, स्वयं को ज्योतिष विद्या का अनुभव व शताधिक बार प्रत्यक्ष प्रमाण भी प्राप्त किये हैं ।

आश्रम के कार्य

सर्वभवनतु सुखिन: की परिभाषा को, भारतीय दर्शन शास्त्रों द्वारा प्रचार-प्रसार।

अनाथ, असहाय व वृद्ध मनुष्यों के लिए नि:शुल्क भोजन-आवासादि की व्यवस्था।

सभी संप्रदाय के दरिद्र नारायणों एवं कुष्ठ रोगों से ग्रस्त लोगो के लिए नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था।

भारत की ग्रामीण जनता जहां चिकित्सा का अभाव है । उन व्यक्तियों के लिए नेत्र शिविरों का आयोजन नि:शुल्क औषधि, चश्में आदि की आवश्यकता अनुसार प्रबन्ध।

 
 
 

 
Copyright Bhuma Niketan Ashram, Haridwar

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